>ठंडा ठंडा कूल कूल

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आकंडे अमूमन बोरियत भरे होते है और यह कम ही लोगों में यह दिलचस्‍पी जगा पाते है। क्रिकेट प्रेमी कई मामलों की तरह इस मामले में भी दुनिया से जुदा है। क्रिकेट प्रेमियों को क्रिकेट के साथ साथ आकंडों का खेल भी कम नहीं रास आता है। ऐस खेल के दीवानों के लिए 1317 आकंडा खास हो सकता है। यह वह आकंडा जिस तक अभी तक आईपीएल में कोई भी बल्‍लेबाज पहुंच नहीं पाया है। दस से ज्‍यादा बल्‍लेबाज एक हजार रनों के आकंडे को पार कर चूके है लेकिन अब भी इस आकंडे तक पहुंचने में उन्‍हें थोडा इंतजार करना पडेगा। बल्‍लेबाज भले ही इस आकंडे तक नहीं पहुंच पाए हो लेकिन आईपीएल ने किंग्‍स इलेवन पंजाब और डेक्‍कन चार्जर्स के बीच मुकाबले के साथ इस उंचाई को पा लिया है। आईपीएली में पहली बार समुद्र सतह से इतनी उंचाई पर कोई मुकाबला खेला गया। इसका गवाह बना खूबसूरत वादियों से घिरा धर्मशाला। प्राकृतिक सौन्‍दर्य से भरपूर यह देवभूमि में पहली बार इतना बडा मुकाबला खेला गया। धर्मशाला जितना रोमांचित कर देता है उतना ही रोमांच यहां खेले गए आईपीएल के पहले मुकाबले में भी रहा। 
पहाड जितने उंचे होते है उतने ही शांत और इरादों के पक्‍के नजर आते है। यह स्‍टेडियम पर भी तीन और से पहाडों से घिरा है। इन्‍हीं पहाडों की तरह धर्मशाला में आईपीएल के पहले मुकाबले में एक शांत लेकिन मजबूत इरादों से भरी पारी रोहित शर्मा ने खेली। उनकी इस राजस्‍थान के खिलाफ भी उन्‍होंने कुछ इसी तरह पारी खेली थी लेकिन अंतिम मौकों पर दबाव की तपिश में उनकी बल्‍लेबाजी का ग्‍लेशियर पिघल गया था। धर्मशाला में उन्‍होंने कोई गलती नहीं की। सुमन के साथ मिलकर उन्‍होंने डेक्‍कन को अभी टूर्नामेंट से बाहर होने से बचा लिया। एक‍ वक्‍त यह लक्ष्‍य डेक्‍कन की पहुंच से बाहर लग रहा था लेकिन मुंबई के इस जांबाज ने कमाल कर दिया।  
डेक्‍कन के गेंदबाजों ने टीम के सेमीफायनल में पहुंचने की सारी उम्‍मीदों को ध्‍वस्‍त करने के लिए मानो कमर कस ली थी। अंतिम पांच ओवरों में डेक्‍कन के गेंदबाजों का प्रदर्शन सबसे खराब रहा है या यूं कहे सबसे घटिया रहा है। धर्मशाला में भी गेंदबाजों ने तमाम कोशिश की कि टीम के साथ जुडा यह टैग अलग न हो पाए। टीम ने अंतिम पांच ओवरों में 76 रन लुटा दिए। आरपी सिंह ने तो रन देने के मामले में अर्धशतक जमा दिया। पर्पल कैप पहने प्रज्ञान ओझा भी पहली बार अपनी छाप छोडने में नाकाम रहे। 
पंजाब किंग्‍स इलेवन के लिए महेला जयवर्धने और संगकारा अब बेहतर नाविक साबित हो रहे है जब टीम की नैया पहले ही डूब चुकी है। खासतौर पर जयवर्धने को ओपनिंग करना रास आ रहा है। धर्मशाला में उन्‍होंने बेहद खूबसूरत पारी खेली। वह आईपीएल में दूसरा शतक जमाने से सात रन से चुक गए लेकिन धर्मशाला के लोगों का दिल उन्‍होंने जीत लिया। संगकारा का बेहतरीन फार्म भी जारी है।  बल्‍लेबाजों ने कमाल दिखाया तो गेंदबाजों ने एक फिर किंग्‍स इलेवन को नीचा दिखाया। खासतौर पर इरफान पठान को न जाने क्‍या हो गया है। उनकी गेंदबाजी में बिलकुल भी दम नजर नहीं आ रहा है। विकेट भले ही उन्‍हें मिल रहे हो लेकिन कभी भी वह खतरनाक नजर नहीं आ रहे है। इस मुकाबले में तो उन्‍होंने हद ही कर दी। अंतिम दो ओवरों में डेक्‍कन को जीत के लिए 19 रनों की जरूरत थी और मुकाबला रोमांचक अंत की और बढ रहा था। पठान को 19 वें ओवर फेंकने की जिम्‍मेदारी सौपी गई। रोहित ने पठान की धज्जियां उडाते हुए 18 रन जुटा लिए। छ‍‍ह गेंदों ने मुकाबले के सारे रोमांच को खत्‍म कर दिया तो जीत की उम्‍मीद में चहक रही प्रिटी जिंटा के चेहरे की खुशियां भी साथ ही काफूर हो गई।  डेक्‍कन के लिए अब आईपीएल का हर मुकाबला करो या मरो की तरह हो गया है। एक भी हार डेक्‍कन के सेमीफायनल के रास्‍ते बंद कर देगी। टीम अब तक जीत का चौका लगा चुकी है। यह चारों जीत तभी मायने रखेंगी जब डेक्‍कन लीग के अंतिम मुकाबले में डेल्‍ही को पराजित करने में कामयाब हो। वर्ना गत विजेता टीम शीर्ष चार में भी जगह नहीं बना पाएगी। अंतिम मौकों पर हुए उलटफेर से पंजाब किंग्‍स इलेवन को उम्‍मीद जगी थी कि शायद सेमीफायनल में पहुंचने का कही कोई रास्‍ता निकल आए, लेकिन प्रिटी जिंटा की टीम के शो का परदा गिर चुका है।
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