>रेहान का मिस्‍टर डिपेंडेबल

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फना फिल्‍म में आमिर खान और उनके बेटे रेहान के बीच एक बेह‍द छोटा लेकिन बेहद रोचक संवाद है। यह संवाद राहुल द्रविड को लेकर है। आतंकी बने आमिर अपने बेटे रेहान से बड़े ही मासूमियत भरे अंदाज में कहते है कि वह राहुल द्रविड की तरह क्रिकेट नहीं खेल सकते है। आमिर कहते है डिपेंडेबल नहीं है और राहुल द्रविड की तरह उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। फिल्‍म में पिता पुत्र के बीच यह कुछ पलों का संवाद था। रेहान को अपने राहुल द्रविड़ पर भरोसा है। द्रविड ने रील लाइफ के रेहान और रियल लाइफ के करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों की नजर में इस भरोसे को एक बार फिर कायम रखा है। राहुल द्रविड ने नागपुर में जता दिया कि क्‍यो उन्‍हें मिस्टर डिपेंडेबल कहां जाता है।

आमिर खान की तरह राहुल द्रविड को मिस्‍टर डिपेंडेबल के साथ मिस्‍टर परफेक्‍ट कहां जाता है। उन्‍हें यह दर्जा शास्‍त्रीय शैली की क्रिकेट खेलने की वजह से हासिल हुआ है। हालांकि वह आमिर खान की तरह खुशकिस्‍मत नहीं है कि जो अपनी स्क्रिप्‍ट से लेकर सह कलाकार और निर्देशक तक चुनने के लिए स्‍वतंत्र है। द्रविड के हाथों में न तो विकेट का मिजाज है और नहीं विपक्षी गेंदबाजों के मिजाज को नियंत्रण करने का हथियार। मौसम के बदलते रूख से भी उन्‍हें दो चार होना पड़ता है। इसके बावजूद वह भरोसेमंद बने हुए है। नागपुर में एक वक्‍त लग रहा था कि भारत एक बार फिर बड़ा स्‍कोर खड़ा करने में नाकाम रहेंगा। ऐसे आड़े वक्‍त में द्रविड विकेट पर अंगद के पांव की तरह जम गए। सचिन, लक्ष्‍मण और रैना के मझधार में साथ छोड़ने के बाद भी उनका धैर्य नहीं डगमाया।

नागपुर राहुल द्रविड का ससुराल होने के साथ साथ संतरों की नगरी भी है। नागपुर पहुंचने के पहले द्रविड का बल्‍लेबाजी फार्म भी संतरों की तरह खट्टा मीठा हो रहा था। तकनीक में कहीं कोई दिक्‍कत नहीं थी। विपक्षी गेंदबाजों की गेंद को समझने में वह गच्‍चा खा रहे थे ऐसा भी कुछ नहीं था। बस वह अच्‍छी शुरूआत को बड़ी पारी में बदल नहीं पा रहे थे। नागपुर में धैर्य, जिद और जज्‍बे के साथ वह मैदान में उतरे और फिर एक बड़ी पारी खेलकर ही लौटे। फार्म में वापसी के लिए इससे बेहतर पारी हो भी नहीं सकती थी।

भारतीय टीम के फेब फोर में लक्ष्‍मण के बाद द्रविड ही ऐसे खिलाड़ी है जिन्‍हें वह श्रेय नहीं मिल पाया जिसके वह हकदार रहे है। भारतीय टीम के जीत की बुलंदियों से छूने के सफर में वह हमेशा नींव का पत्‍थर बने रहे। 21 नवंबर की शाम को भी जब द्रविड 67 रन बनाकर नाबाद थे तो किसी का ध्‍यान उन पर नहीं था। हर किसी की जुबां पर केवल और केवल सचिन तेंदुलकर के 50 वें शतक की दहलीज पर खड़े होने की चर्चा थी। 22 नवंबर को सचिन दिन की नौ गेंदों के बाद पैवेलियन लौट गए। एक बार फिर लगा कि न्‍यूजीलैंड के आक्रमण के सामने भारत का मध्‍यक्रम लड़खड़ा जाएगा। ऐसी ही मुश्किल घड़ी में द्रविड टीम के तारनहार बनकर सामने आए। द्रविड के जमाए शतक ने केवल भारतीय पारी की नींव को मजबूती नहीं दी बल्कि इसी शतक की बदौलत भारत श्रृंखला फतह करने में भी कामयाब रहा।

द्रविड हर मुश्किल घड़ी में टीम इंडिया के काम आए। आस्‍ट्रेलिया के खिलाफ ईडन गार्डन में वीवीएस लक्ष्‍मण की 281 रनों की पारी का जिक्र होता है लेकिन विकेट की दूसरी ओर जमे रहकर 180 रनों की पारी खेलने वाले द्रविड को याद नहीं किया जाता। सचिन के शतक और गांगुली की कप्‍तानी में आस्‍ट्रेलिया में मिली टेस्‍ट जीत का समय समय पर जिक्र होता है लेकिन ऐडिलेड में उनकी मैच विनिंग पारी का भूले से भी जिक्र नहीं होता।

राहुल द्रविड की फितरत ही ऐसी है कि उनके लिए बल्‍ले से निकलने वाले रन और टीम की जीत के अलावा कोई बात मायने नहीं रखती। द वॉल को न तो इस बात की कोई शिकन है कि भारतीय टीम की बल्‍लेबाजी का बोझा वह साल दर साल ढो रहे है और ना हीं इस जवाबदारी को लेकर किसी तरह का कोई घमंड। वह उस सैनिक की तरह है जो एक मोर्चा फतह करने के बाद अगला मोर्चा फतह करने के लिए निकल पड़ता है।

कुल जमा राहुल द्रविड का व्‍यक्तित्‍व टीवी पर दिखाए जाने वाले एक सीमेंट कंपनी के विज्ञापन की तरह है। यह विज्ञापन संदेश देता है कि एक खास किस्‍म के सीमेंट से बनी दीवार टूटेगी नहीं।भारतीय टीम की यह दीवार भी करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों की उम्‍मीदों पर यूं ही मजबूती से हर मोर्चे पर खडी है।  विपक्षी गेंदबाजों के हर थपेड़े को झेलने के बाद द वॉल का आवरण चमकदार और विश्वसनीय बना हुआ है।

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3 thoughts on “>रेहान का मिस्‍टर डिपेंडेबल

  1. >bilkul sahi likha hai manoj bhaiya… test to thik hai odi may bhi rahul ko kabhi itna mahatav nahi mila 2003 world cup may india ke final may pahuchne may rahul ka youdaan tha ,,, kuki usi ke w.keping karne ke karan india 7 batsman ke saath utar pai thi… aur jaha tak taknik ka sawal hai rahul jaisa koi nai hai

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