>यादगार लम्हा

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एक अरब 21 करोड़ लोगों की दुआ रंग लाई। 28 साल बाद क्रिकेट की दुनिया में भारत का परचम फिर लहराया। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर का अधूरा ख्वाब हकीकत में बदल रहा था। जीवन के सबसे गौरवशाली क्षणों में क्रिकेट का भगवान भी भावुक हो उठा। 22 साल के लंबे कैरियर में जो नहीं हुआ वह देखने को मिला। सचिन का चेहरा आंसूओं से भींगा हुआ था।

सचिन अच्छे अच्छे गेंदबाजों को रूला देते है लेकिन दो अप्रैल की रात को वानखेड़े स्टेडियम पर मास्टर ब्लास्टर की आंखे छलक रही थी। क्रिकेट के मैदान पर बरसों से अपने इमोशन को कन्ट्रोल करने वाले सचिन वर्ल्ड कप की जीत के इस लम्हे को जीकर इतने भावुक हो गए कि आंखों से आंसू रोक नहीं सकें।

टीम इंडिया के खिलाड़ियों के चेहरे आंसूओं से भरे हुए थे। इन दृश्यों के अलावा वर्ल्ड कप जीत के बाद सचिन को अपने कंधों पर उठाए स्टेडियम का चक्कर लगा रहे उनसे आधी उम्र के विराट कोहली की तस्वीर भी सामने आ जाती है तो साथ ही याद आता विराट का उम्मीदों से बढ़कर दिया गया बयान जिसमें सचिन को कंधे पर बैठाकर स्टेडियम का चक्कर लगाने पर वह कहते है ‘ 21 साल तक देश की उम्मीदों का बोझ उठाया है और आज हमारी बारी थी उन्हें कंधे पर उठाकर सम्मान देने की।’

वर्ल्ड कप जीत का खुमार इतना था कि एक दृश्य जो लोगों के जेहन में बस नहीं पाया। यह वह क्षण था जब मैच के बाद सचिन तेंडुलकर इंटरव्यू दे रहे थे। इस दौरान सचिन फिर भावुक हो उठे थे। ऐसे में इंटरव्यू लेने वाले संजय मांजरेकर पर किसी की नजर नहीं पड़ी।


यह वही संजय मांजरेकर थे जो कुछ सालों पहले सचिन पर अपने कड़वे बोलों से लिपटे बयानों की बाउंसर फेंक रहे थे। कभी सचिन को असफलताओं से डरने वाला बताया तो आए दिन घायल होने और उनकी फिटनेस पर सवाल खड़े किए। आस्ट्रेलिया के खिलाफ जब भारत 351 रनों के भारी भरकम लक्ष्य से तीन रन दूर रह गया था तब भी मांजरेकर सचिन पर बरस पड़े थे। सचिन 175 रनों की पारी खेलने के बाद आउट हुए थे। इतने नजदीक पहुंचने के बाद मुकाबला नहीं जीतने पर सचिन को अफसोस रहा लेकिन मांजरेकर को उस समय भी कटाक्ष करने का मौका मिल गया था। मांजरेकर ने कहा कि मुझे पता था कि सचिन आखिरकार टीम को निराश कर जाएंगे जैसा उन्होंने पहले भी किया है। पहले भी कई ऐसे मौके रहे हैं, जब सचिन टीम को जीत की दहलीज पर पहुंचाकर खुद ही फिसल गए और अब एक बार फिर उन्होंने ऐसा ही किया।

सचिन तेंडुलकर अमूमन संजय मांजरेकर की आलोचनाओं का जवाब देने से बचते रहे। केवल मांजरेकर नहीं बल्कि किसी भी आलोचना का जवाब अपने बल्ले से देने वाले सचिन ने वर्ल्ड कप में भी कुछ ऐसा ही करिश्मा किया था। एक दौर में लगातार हो रही आलोचना के बाद सचिन ने जवाब दिया था कि उन पर जो पत्थर फेके जाते है वह उन्हे माइल स्टोन में बदलने में भरोसा रखते है। वर्ल्ड कप जीतने के बाद सचिन एक बार फिर उस बात को सार्थक करते नजर आए। संजय इन बातों को समझ न पाए क्योंकि वह माइल स्टोन बनाने में नहीं बल्कि शायद पत्थर फेंकने में ज्यादा भरोसा करते है।
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