24 फरवरी, 24 सीढ़िया, मीठी सुपारी… एकतरफा मोहब्बत

Sachin Tendulkar 01सचिन और क्रिकेट की मोहब्बत देख उमराव जान का वह संवाद याद आ जाता है जिसमें कोठे में बैठा एक बुजुर्ग उमराव जान से कहता है ‘या तो किसी की हो जाओ या किसी को अपना बना लो।’ सचिन तेंडुलकर और क्रिकेट की मोहब्बत का फलसफा भी कुछ ऐसा ही है। सचिन के लिए ये लाइन मैंने काफी समय पहले अपने एक ब्लाग में लिखी थी, लेकिन वो बात थी सचिन की मोहब्बत की। सचिन के लिए अपने दिल में भी कुछ ऐसी ही एकतरफा मोहब्बत है। सचिन अपने पसंदीदा क्रिकेटर है ये बात किसी से छुपी नहीं है लेकिन उनके खेल के दीवानगी किसी हद तक है ये कोई जानता भी नहीं है। शायद ये बात कभी लफ्जों में या फिर शब्दों में बयां भी नहीं होती, यदि सचिन यूं अचानक लिमिटेड ओवर क्रिकेट फार्मेट को अलविदा न कह देते, तो शायद ये राज हमेशा राज ही रहता।

वो तारीख मुझे अब भी अच्छे से याद है। भला 24 फरवरी तारीख में कैसे भूल सकता हूं। मेरे एक बड़े भैय्या का बर्थ डे इसी दिन आता है, उस ख़ास दिन वनडे क्रिकेट के 40 साल के इतिहास में दोहरा शतक जमाने वाले सचिन तेंदुलकर पहले क्रिकेटर बने थे… सचिन किसी मैच में खेल रहे हो तो… मोबाइल पर क्रिकइंफो के जरिए या फिर एसएमएस सर्विस के जरिए अपनी नजर मैच पर पूरे समय रहती है… लेकिन 24 फरवरी का ये मैच ख़ास था क्योंकि ये अपने ही प्रदेश के ग्वालियर में हो रहा था… ऐसे में बात थोड़ी अलग हो ही जाती है।

खैर सचिन ने 37 गेंदों पर अपना अर्धशतक पूरा किया तो शतक की उम्मीद जगने लगी… 90 गेंदों में सचिन ने अपना शतक भी पूरा कर लिया… तो अपना टेंशन खत्म हो गया कि कम से कम सचिन के प्रदर्शन पर कोई सवाल नहीं उठाएगा… बेफ्रिक होकर ख़बरों की पड़ताल करने में जुट गए… लेकिन लगभग आधे घंटे बाद सचिन 150 पार कर गए तो नया टेंशन शुरू हो गया… 38वें ओवर में सचिन दोहरे शतक से कुछ 45 रन दूर थे… अब दोबारा नजर टीवी पर गढ़ाए बैठ गए थे।

धीरे धीरे सचिन दोहरे शतक की ओर बढ़ने लगे… सचिन ने 186 रनों का अपना सर्वाधिक व्यक्तिगत रन का स्कोर पीछे छोड़ दिया था… अब दिल में धकधक तेज हो गई थी… दोहरे शतक की उम्मीद की जगह शायद सचिन ये मौका न चूक जाए इसकी आशंका सताने लगी थी… क्योंकि नर्वस नाइंटीज से सचिन की मोहब्बत बेइंतहा है…. खैर सचिन धीरे धीरे दोहरे शतक के करीब पहुंचने लगे… 45वें ओवर की तीसरी गेंद थी जब सचिन ने सईद अनवर के 195 रनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया था… अब दोहरा शतक केवल चार रनों की दूरी पर था… और गेंदे बची थी 27।

अब तो लगा कि सचिन दोहरा शतक आसानी से बना ही लेंगे… अपनी खुशी का ठिकाना नहीं था… अपना सचिन वो करने जा रहा था जो आज तक किसी क्रिकेटर ने नहीं किया था..लेकिन ये क्या, एक के बाद एक ओवर खत्म होने लगे… धोनी चौके-छक्के जड़ रहे थे… सचिन को बल्लेबाजी का ही मौका नहीं मिल रहा था… अपन मन ही मन धोनी को कोस रहे थे… लेकिन जब 48 ओवर पूरे हो गए तब भी सचिन 199 पर ही अटके रहे तो फिर अनजान सा डर सताने लगा था…

टीवी पर टेंशन था तो दूसरी ओर लाइव का दबाव अलग था… सचिन के दोहरे शतक की आस में लाइव के लिए पीसीआर से फोन पर फोन आ रहे थे… पर मन टीवी के सामने से हटने का नहीं कर रहा था…. वो तो भला हो विजय मांडगे और आशुतोष नाडकर का जिन्होंने वैकल्पिक इंतजाम जुटा दिए थे… ओबी इंजीनियर जीतेन्द्र चौहान भी उनकी मदद कर रहे थे… लेकिन अपना मन तो लाइव के बजाए टीवी पर लगा हुआ था… 49वां ओवर भी खत्म हो रहा था और सचिन ने एक भी गेंद फेस नहीं की थी… अब तो पक्का लगने लगा कि कही सचिन को एक भी गेंद खेलने का मौका ना मिले या वो जल्दबाजी में कोई गलत शॉट न खेल दे।

Sachin Tendulkar 02

अब हम भी ठहरे सचिन के पक्के भगत…. तो हर हाल में अपनी मोहब्बत के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार बैठे थे… ये वो दौर था जब मैं भोपाल में कुछ महीने बीता चुका था… ख़बरों की दौड़भाग और घर से दूर रहने के दौर में एक भोपाली आदत लग गई थी… वो आदत थी मीठी सुपारी खाने की… चाय उस वक्त चार रूपए कट मिलती थी… सो चाय एक लो या कई… अमूमन एक या दो रूपयों का बेलेंस बनता ही था… इसी बेलेंस ने मीठी सुपारी खरीदने की आदत डाल दी… धीरे-धीरे ये आदत बढ़ने ही लगी थी… तो जब सचिन शतक से एक रन दूर थे और एक अदद गेंद खेलने के लिए तरस रहे थे… खुद ही फैसला ले लिया कि सचिन दोहरा शतक जमा लेते है तो जीवन में कभी मीठी सुपारी न तो खरीदेंगे और नहीं मांगकर खाएंगे…

हम तो प्रण ले चुके थे… लेकिन कैप्टन कुल न जाने क्या ठानकर बैठे थे… उन्होंने 50वें ओवर की पहली गेंद पर छक्का जड़ दिया… दूसरी गेंद पर भी जमाया तो उन्होंने करारा शॉट था… आज भी अच्छे से याद है एमपी नगर के उस ऑफिस के छोटे से टीवी पर हम 8-10 लोग मैच देख रहे थे… धोनी के इस शॉट पर अमला से गेंद मिस फील्ड हो जाती है… दूसरे रन की पूरी संभावना थी… लेकिन धोनी और सचिन में शायद सहमति बन चुकी थी… इसलिए दोनों एक रन पर सेटल हो गए… अब ओवर की तीसरी गेंद थी… सचिन से ज्यादा टेंशन में हम थे… मानों खुद ही बल्लेबाजी कर रहे हो… यकीन मानिए अपन ने तो आंखे बंद कर ली थी… ओर आंखे उसी समय खोली जब आसपास के साथियों का शोर और रवि शास्त्री की बुलंद आवाज सुनी… फर्स्ट मेन ऑन द प्लॉनेट… सचिन दौड़कर रन पूरा कर आधी पिच तक धोनी से मिलने पहुंचते और अपनी हेलमेट निकालकर अभिवादन करते… मुझमें भी न जाने कैसी फुर्ती आ गई थी… सचिन दर्शकों का अभिवादन करते उसके पहले मैं 24 सीढ़ियां नीचे पहुंच चुका था… और सचिन आसमां की ओर देख हर बार की तरह कुछ पल देखते… उसके पहले अपन ऑन एयर हो चुके थे… और सचिन की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर आम लोगों का पहला रिएक्शन ले रहे थे…

24 फरवरी 2010 को वो दिन है और आज 24 फरवरी 2014… यकीन मानिए सचिन के प्रति अपनी मोहब्बत पर हम कायम है… न तो उस दिन के बाद कभी मीठी सुपारी खरीदी… और नहीं कभी किसी से खुद होकर सुपारी मांगकर खाई है… ये मोहब्बत यूं ही जारी रहेगी… सचिन भले ही अब इसके आगे कभी अपनी 10 नंबरी जर्सी में नजर नहीं आएंगे… इससे आगे कुछ लिखने की हिम्मत नहीं हो रही है… अब एक-एक शब्द लिखना भी मेर लिए भारी हो रहा है… कई बार आपका आपके इमोशनस पर कंट्रोल नहीं रहता है… मेरी हालत भी कुछ ऐसी ही हो रही है। अलविदा सचिन।

Advertisements

4 thoughts on “24 फरवरी, 24 सीढ़िया, मीठी सुपारी… एकतरफा मोहब्बत

  1. मुझे याद है जब हम बचपन में टीवी या स्टेडियम पर मैच देखते थे तो घर के बड़े लोग भारतीय टीम की तरफ देखकर कहते थे कि अरे, यह भी कोई खिलाड़ी हैं, गावस्कर, विश्वनाथ, कपिल, अमरनाथ वगैरा-वगैरा का कोई जोड़ ही नहीं था। आखिरकार हमारे पास एक ऐसा नाम अब मौजूद है जिसके बारे में हम सालों बाद उस दौर के बच्चों को टीवी देखते हुए कह सकेंगे कि यह भी कोई शॉट है, शॉट तो सचिन मारता था।

    कहते हैं कि जिंदगी जीने के असल माएने वही समझ पाता है जिसको दर्द होता है या उसने दर्द झेला होता है, वैसे ही शायद अब करोड़ों भारतीय फैंस क्रिकेट को जी नहीं सकेंगे क्योंकि सचिन के शतक पर मचने वाली चीख पुकार से ज्यादा प्रभावित करने वाली होती थी वह एक उफफफफफफ जो उनके आउट होने पर सड़क पर खड़े ठेले से लेकर आपके बेडरूम और मिठाई की दुकान तक में सुनाई देती थी। खिलाड़ी अब भी आउट होंगे, खिलाड़ी अब भी शतक से चूकेंगे, अब भी खिलाड़ी इतिहास रचेंगे और जश्न मनाया जाएगा लेकिन करोड़ों फैंस द्वारा ली गई वह लंबी सांसें और एक विकेट गिरने पर निकलने वाली वह करोड़ों उफफ शायद अब उस भावना से सुनने को ना मिलें।

    (शिवम अवस्थी के लेख का अंश : ‘जागरण’ से साभार )

  2. ab cricket match dekhne ka man nhi hota ………… ab bas Dhoni hi hai jisne mujhe cricket se jod rakha hai….shayad iske baad koi aur aayega…. tv par cricket na dekho to mere haath sirf remote par channel hi badalte rehte hain…
    isliye manoj bhai kisi na kisi ke liye deewangi bani rahe……..

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s