दिल्ली गैंगरेप, फेसबुक और पीड़िता की जगह लड़के का फोटो

दिल्ली गैंगरेप पीड़िता अब नहीं रही… मौत से 13 दिनों की जंग के बाद जिंदगी हार गई… देश शर्मसार है… हर कोई दुखी है… ओर इजहार- ए -संवेदना, गम, आक्रोश करने का सबसे सशक्त माध्यम बना है सोशल नेटवर्किंग माध्यम… इसमें भी फेसबुक सबसे आगे है… सोशल माध्यम पर सरकार को कोसने के साथ साथ पीड़ित युवती और उसके परिवार के लिए संवेदनाएं व्यक्त करने के लिए मानो होड़ मची हुई है।

आधी रात को जब इस लड़की की हालत नाजुक थी…तब उसकी हालत जानने की बजाए रजाई तानकर नींद निकालने वाले लोग शनिवार सुबह अख़बारों और टीवी माध्यमों से ख़बर मिलने के बाद फेसबुक पर टूट पड़े… इसी दौरान किसी बेहद फुरसतिए या कहें किसी शातिर ने एक तस्वीर भी फेसबुक पर अपलोड़ कर दी… अस्पताल में एक मरीज की ये तस्वीर कुछ मिनटों में एक वॉल से दूसरी वॉल पहुंचने लगी… कोई इसका रिडिजाइन कर रहा था… तो कोई इसे अपने तरीके से पेश कर रहा था…. टैग करने वाले भी कम नहीं थे… फेसबुक पर ये तस्वीर जितनी तेजी से फैली वो बताने के लिए काफी है कि फेसबुक यूजर किस भेड़चाल में शामिल है… उसे ये जानने में दिलचस्पी नहीं है कि वो जिस बात को अपने नाम से प्रसारित कर रहा है… या किसी ओर के स्टेट्स को अपनी वॉल पर कैरी कर रहा है… उसमें किंचित भी सत्यता है या नहीं… मेरा विरोध न माध्यम का है… नहीं इसके यूजर को कोसने का… बल्कि मैं तथ्यों के साथ अपनी बात रख रहा हूं…

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ये वो तस्वीर है जो दिल्ली गैंगरेप पीड़िता से जोड़ी जा रही है… वो दिल्ली गैंगरेप पीड़िता की नहीं है… ये Christo van Eeden, की है… हास्यास्पद बात ये है कि ये फोटो किसी लड़की की न होकर 19 साल के लड़के की है… जिसकी बीमारी की वजह से ये हालत हुई है… इंटरनेट पर सबसे पहले ये फोटो आठ अगस्त 2010 को इंटरनेट पर अपलोड़़ हुई थी… इस युवक की ये हालत किसी ओर नहीं बल्कि उसकी मां के एक्स बॉयफ्रेंड ने की थी… बेरहमी से पिटाई की वजह से उसकी ये हालत हुई थी… इसके बाद जब वो अस्पताल में भर्ती हुआ था… उस समय की ये तस्वीर है… जिसे हमारे ज्ञानी और खुद को सबसे श्रेष्ठ बताने वाला वर्ग दिल्ली गैंगरेप से जोड़कर प्रचारित कर रहा है।

तीन दिनों के भीतर ये दूसरा मामला है… जिससे मुझे ये लिखने को मजबूर किया… इसी सप्ताह पी. चिदंबरम और एक सैनिक की तस्वीर को जोड़कर फेसबुक पर प्रचारित किया जा रहा था… तस्वीर में चिदंबरम को मिनरल वॉटर की बोतल के साथ तो सैनिक को खाना खाते समय मटमैले पानी की बोतल के साथ दिखाया गया था… सरकार को जी भरकर कोसा भी गया था… लेकिन वास्तविकता ये थी कि वो तस्वीर पाकिस्तानी सैनिक की थी।

केवल फेसबुक यूजर के लिए नहीं बल्कि सोशल नेटवर्क से जुड़े हर किसी शख्स के लिए ये आत्ममंथन का समय है… क्या ये माध्यम अपनी खासियत पीछे छोड़ रहा है… ऑरकुट का हाल सबने देख लिया… फेसबुक भी शायद उसी राह चल पड़ा है… अब मार्क जुकेरबर्ग से क्या शिकायत करूं वो तो खुद अपनी बहन की फेसबुक पर निजता का ध्यान नहीं रख पाए… सुधरना और संभलना हमे ही होगा… क्योंकि हर माध्यम अपनी अच्छाई के साथ कुछ बुराई भी लेकर आता है… ये हम पर है कि हम किसी पहलू को अपने करीब पाते है।

नोटः यदि मेरी बात पर यकीन न हो तो गुगुल पर या किसी भी सर्च इंजर पर Christo van Eeden टाइप कर इस बात की सत्यता को परखा जा सकता है, या फिर इस लिंक को चेक कर लीजिए सबकुछ साफ हो जाएगा।

http://www.news24.com/SouthAfrica/News/Womans-ex-attacks-her-son-20100810

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2 thoughts on “दिल्ली गैंगरेप, फेसबुक और पीड़िता की जगह लड़के का फोटो

  1. majedaar hai.. par samajahne ke liye isko aise dekha ja sakta hai ki pahale ek madhyam aata hai, fir popular hota hai, fir gadbadiya hoti hai waha, fir aap jaise log ki wajah se sudhar shuru hota hai………

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