उत्तराखंड की त्रासदी और सोशल मीडिया पर फर्जीवाड़ा

फेसबुक पर इन दिनों एक फोटो बेहद सुर्खियों में है। उत्तराखंड त्रासदी के बाद इस फोटो को सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर और खासतौर पर फेसबुक पर यह बताकर शेयर किया जा रहा है कि यह जोड़ा भी इस हादसे का शिकार होकर अपनी जान गंवा चुका है। किसी एक ग्रुप या पेज पर नहीं बल्कि कई दर्जन पेज और ग्रुप में इसे शेयर किया जा रहा है। लाखों लोग अब तक इस तस्वीर को फेसबुक पर उत्तराखंड त्रासदी के नाम पर शेयर कर चुके है। इनमें दर्जनों ऐसे लोगों को मैं जानता हूं जिनका सरोकार मीडिया या ऐसे माध्यम से है जो इस तस्वीर की तस्दीक कर सकते थे, लेकिन किसी ने भी यह जानने की जद्दोजहद नहीं की कि यह तस्वीर वाकई में उत्तराखंड की है या नहीं।
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दरअसल, यह तस्वीर उत्तराखंड त्रासदी के काफी पहले की है। यह तस्वीर 10 मई की है जब बांग्लादेश में आठ मंजिला इमारत ध्वस्त हुई थी। बांग्लादेश के इस सबसे बड़े औद्योगिक हादसे में करीब 900 लोगों की मौत हो गई थी। इसी हादसे का यह फोटो बांग्लादेश के फोटोग्राफर तस्लीमा अख्तर ने खींचा है। इस फोटो में युगल अपनी जिंदगी के आखिरी क्षणों में एक दूसरे से आखिरी बार आलिंगनबद्ध हुए। दोनों का आधा शरीर मलबे में धंसा हुआ है। यह फोटो टाइम्स मैगजीन के लाइट बॉक्स में छपा है इस पर डेविड वॉन ड्रेहले का का आर्टिकल भी है जिसमें उन्होंने लिखा है कि यह तस्वीर मन को अशांत तो कर देती है पर उतनी ही खूबसूरत भी है।

Blog 02अब इस बांग्लादेशी जोड़े को भारतीय और चारधाम की यात्रा के दौरान हादसे का शिकार बताया जा रहा है। मसला केवल इस जोड़े का नहीं है, सेना के जवानों का एक फोटो भी धडल्ले से शेयर किया जा रहा है। इस फोटो में सैनिकों को तेज बहाव में बहती एक नदी पर रस्सी के पुल पर खुद को लेटकर मानवीय पुल बनाते हुए एक महिला और बच्चे को बाढ़ से बचाने का दृश्य है। दरअसल, यह तस्वीर भारतीय सेना की नहीं है। यह तस्वीर जापानी आर्मी की है और यदि फोटो को गौर से देखा जाए तो आसानी से पता चल जाएगा कि यह जापानी सेना है। सोशल अशिक्षा केवल हमारे यहां नहीं है बल्कि दुनिया के सबसे बड़े इंटरनेट यूजर वाले चीन में भी इस तस्वीर को पिछले काफी समय से अपने सैनिकों का फोटो बताकर शेयर किया जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि नरेन्द्र मोदी को देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में देखने वाले ग्रुप में इस फोटो को भारतीय सेना का बताकर यूपीए सरकार को जी भर कर कोसा जा रहा है।

उत्तराखंड त्रासदी पर सोशल मीडिया पर तीसरी त्रासदी के रूप में एक वीडियो है। यह वीडियो भूस्खलन के दौरान एक बस के गहरी खाई में समाने का है। इस वीडियो को उत्तराखंड का बताया जा रहा है जबकि यह वीडियो साल 2011 का है जब बोलेविया में पहाड़ी रास्ते को पार करते वक्त बस इस तरह गहरी खाई में समा गई थी। सोशल नेटवर्क के भेड़चाल में शामिल लोगों ने इस बात पर भी ध्यान नहीं दिया कि उत्तराखंड में स्लीपर कोच नहीं के बराबर चलते है। यह वीडियो सोशल नेटवर्क पर वायरल है।

इस ब्लाग का आशय सोशल मीडिया की आलोचना करना नहीं है, बल्कि यह बताना है कि किसी भी बात को शेयर करने के पहले उस पर जरूर यह विचार किया जाना चाहिए कि वह वाकई में सही है या नहीं।

उत्तराखंड में जो हुआ उन्हें लफ्जों में बयां नहीं किया जा सकता। कुदरत अपना तांडव पूरी दुनिया में दिखाती रही है लेकिन अमूमन इसका असर किसी क्षेत्र विशेष के लोगों पर होता है। यह अपनी तरह की पहली त्रासदी है जिससे पूरे देश को इसकी चपेट में लिया हो। भारतीय सेना से लेकर स्थानीय लोगों ने आपदा की घड़ी में साहस के साथ धैर्य का परिचय दिया है वो पीड़ित लोगों के लिए साक्षात भगवान बनकर आए और उन्हें मौत के मुहं से बचा लाए।

 

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11 thoughts on “उत्तराखंड की त्रासदी और सोशल मीडिया पर फर्जीवाड़ा

  1. I agree with u Manoj… People just click share button on fb without even thinking that news is right or wrong… Promoting things like this is actually worse then spreading rumors

  2. was waiting for someone to catch the reality. even i observed that the photograph of army do not belong to India. thanks for the info in simple and straight words.

  3. इस तरह की अन्य फोटो पहले भी सोशल साइटृस पर देखने को मिल चुकी है, शेयर करने वाले न जाने क्या सोचकर ऐसा करते हैं, आम लोग नहीं बल्कि कई खास भी इस तरह की फोटो शेयर कर रहे हैं, कुछ दिन पहले अपने ही एक मीडिया साथी ने भी इस फोटो को केदारनाथ के नाम से जोड था, भाई साहब को असलियत बताई तो बोले क्या फर्क पडता है, भावनाओं को समझो…

  4. Social media like FB is a strong weapon in hands of today’s youth. Very useful when used well. Everyone must ensure the authenticity and positivity of our own posts at least in case of serious issues like national calamities.

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