ये जिंदगी ना मिलेगी दुबारा

किंजल अब इस दुनिया में नहीं है… किंजल से यूं कोई पूर्व पूर्व परिचय नहीं था… फिर भी उसकी मौत का गम है… 12 वीं की स्टूडेंट किंजल से मेरा पहला और आखिरी परिचय उस समय हुआ था… जब वो जिंदगी की अंतिम सांसे गिन रही थी… एमवाय अस्पताल के डॉक्टरों की एक टीम उसकी जिंदगी की टूटी डोर को जोड़ने की कोशिश कर रहे थे… करीब आधे घंटे में डॉक्टरों की टीम के प्रयास नाकाफी साबित हुए और जिंदगी से जंग में मौत एक बार फिर बाजी मार गई।

किंजल की मौत का गम मुझे इसलिए क्योंकि उस आधे घंटे में मैंने जो देखा या महसूस किया… यदि वह किंजल भी महसूस करती तो शायद चौथी मंजिल से नीचे छलांग लगाने का कदम कभी नहीं उठाती… किंजल अब तुम अस्पताल मे तड़त रही थी उस समय तुम्हारी मां को तो होश नहीं था… जिसने बड़े नाजों से तुम्हें बड़ा किया… उन्हें तुम यूं बिलखता हुआ छोड़कर चली गई… तुम्हारे सारे करीबियों की आंखों में आंसू थे… तुम्हारे पिता बमुश्किल अपने इमोशन पर काबू रखे हुए… किसी तरह आंखों से आंसू न छलके इसके लिए वो भीतर ही भीतर एक जंग लड़ रहे थे…. और तुम्हारे छोटे भाई के बारे में क्या बताऊं… किंजल तुम तो चली गई… लेकिन तुमने अपने छोटे भाई के बारे में सोचा है… जिसे यह खबर थी कि उसकी दीदी का एक्सीडेंट हो गया है… वो अस्पताल में किसी अनहोनी के डर से कांप रहा था… काश तुम उसे एक बार देख पाती… तो अपनी जिंदगी को यूं न खत्म कर लेती…. उसका हाल देख किसी की भी रूह कांप जाए… तुम तो चली गई… अपने सारे दुख दर्द को खत्म कर… लेकिन क्या ऐसा करने के पहले तुमने सोचा था कि अपनों को जिंदगी भर का दर्द देकर जा रही हो… अब तुम्हारा छोटा भाई राखी पर किसका इंतजार करेगा… तुम्हारी तकलीफ छोटी या बड़ी हो सकती है… लेकिन तुमने इन तकलीफों से निजात पाने के लिए जो कदम उठाया है वो तुम्हारे अपनों के लिए हर दिन का दर्द दे गया… क्या तुमने सोचा नहीं कि हर त्योहार पर तुम्हारी याद उनकी आंखों में आंसू ला देगी… स्कूल जाने वाली हर लड़की को देख वो उनमें तुम्हारा अक्स महसूस करेंगे।

किंजल हो सकता है कि परिवार में वैचारिक मतभेद हो… लेकिन क्या इस पर कोई ऐसा कदम उठा लेता है… अनुशासन का पहला सबक मां और पिता से ही मिलता है… यदि किसी बात की उन्होंने पाबंदी लगाई तो… तुम्हारा भला चाहने के लिए ही उन्होंने ऐसा किया होगा… वो तुम्हारे दुश्मन तो नहीं थे।

तुम तो चली गई… लेकिन केवल तुम्हारा परिवार दुखी नहीं था… जांच करने पहुंचे पुलिस के अधिकारी भी इस बात से मायूस थे… सीसीटीवी में उन्होंने सीढ़ियों से उस अपार्टमेंट में जाते हुए देखा था… जिसे तुमने सुसाईड के लिए चुना था… हर किसी ने तुम्हारे परिवार का दर्द महसूस किया… लेकिन यह जानने के लिए तुम नहीं थी…किंजल बात केवल तुम्हारी नहीं है… पिछले दिनों तुम्हारी तरह एक अन्य छात्रा ने भी 12वीं में 77 फीसदी अंक को भी कम मानकर अपनी जान दे दी थी… वजह कुछ भी हो… लेकिन किसी भी परेशानी का हल जिंदगी को खत्म कर लेना कतई नहीं है… खुदकुशी करने वाला तो चला जाता है…. लेकिन अपने पीछे छोड़ जाता है अपने परिवार के लिए ऐसे जख्म जिसकी टीस उन्हें ताउम्र दर्द देती है। जान देने के पहले एक बार तो सोच लिया जाता… ये जिंदगी ना मिलेगी दुबारा। किंजल यह पढ़ने के लिए तुम इस दुनिया में नहीं हो लेकिन उम्मीद करूंगा कि इसे पढ़कर कोई तुम्हारी तरह गलती नहीं करें तो बेहतर होगा।

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