Website की एक छोटी सी चूक से उजागर हो गया SEX ATTACK पीड़िता का नाम

यदि आप सोचते है कि व्हाइटनर की मदद से छुपाई गई जानकारी को कोई पढ़ नहीं सकता है तो यह आपकी भूल है… कम से कम कम्प्यूटर के मामले में तो आप इस पर बिलकुल भरोसा नहीं कर सकते… क्योंकि यहां व्हाइटनर धोखा दे जाते है… एक ऐसे ही SEX ATTACK से जुड़े मामले में एक वेबसाइट बड़ी मुसीबत में फंस गई है।

बात इंग्लैंड के मैनचेस्टर शहर की है… जहां की एक वेबसाइट किसी कानूनी जानकारी नहीं बल्कि एक सामान्य तकनीकी गलती की वजह से एक ऐसी मुसीबत में फंस गई… जिससे बाहर निकलने का उसे कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है।

दरअसल, ग्रेटर मैनचेस्टर पुलिस ने हाल ही में एक प्रेस नोट जारी किया था… यह प्रेस नोट यौन उत्पीड़न को लेकर ब्लैकमेल को लेकर था… जिसके आरोपी को जेल भेजा गया था… आरोपी अपने ही मित्र को यौन उत्पीड़न के एक ऐसे मामले में ब्लैकमेल कर रहा था जो असल में हुआ ही नहीं था… इतना ही नहीं पुलिस ने प्रेस नोट के साथ वो हस्तलिखित पत्र भी जारी किया था जिसमें पीड़िता को इसके एवज में राशि मिलने की बात आरोपी कह रहा था।

पुलिस ने इस हस्तलिखित दस्तावेज का इस्तेमाल सबूत के तौर पर किया और प्रेस नोट के साथ उस दस्तावेज को भी जारी किया… जो PDF फार्मेट में था.. इस दस्तावेज में जहां-जहां पीड़िता के नाम का जिक्र था… उसे व्हाइटनर की मदद से ब्लैंक कर दिया गया था… जिससे की उसकी पहचान उजागर न हो… जैसा की मैनचेस्टर शहर की एक वेबसाइट में प्रकाशित ख़बर में नजर भी आ रहा है।

PDF

इसी शहर की एक अन्य वेबसाइट PDF फाइल को अपलोड नहीं कर पा रही थी… ऐसे में वेबसाइट से जुड़े कर्मचारियों ने PDF फाइल को JPEG में कंवर्ट किया और उसे प्रकाशित कर दिया। वेबसाइट को पता नहीं था कि फाइल कंवर्ट करने के लिए जो सामान्य प्रकिया अपनाई थी… इससे वह कितनी बड़ी मुसीबत में फंसने वाली है… दरअसल, फाइल कंवर्ट होने के समय सिस्टम ने व्हाइटनर की मदद से छुपाए गए पीड़िता के नाम को भी पढ़ लिया और जब फाइल PDF से JPEG में कंवर्ट हुई तो उसमें पीड़िता का नाम भी नजर आ रहा था… इस बात से अनजान वेबसाइट ने वो ही इमेज अपलोड़ भी कर दी।

पीड़िता को जैसे ही इस बात की जानकारी लगी… उसने तुरंत आपत्ति दर्ज कराई… जिसके बाद वेबसाइट से उस इमेज को हटा दिया गया… अभी वेबसाइट इसे तकनीकी अज्ञानता बताते हुए अपनी सफाई दे रही है… लेकिन यह मामला जल्द खत्म होता नहीं दिख रहा है… यदि वेबसाइट की यह दलील काम नहीं आई तो… उस पर पांच हजार पाउंड यानि पांच लाख रूपयों से ज्यादा का जुर्माना हो सकता है।

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